शिमला, 03 सितंबर (हि.स.) : हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के आखिरी दिन गुरुवार को चार महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए। इनमें हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2026, भारतीय स्टांप (हिमाचल प्रदेश द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2026, युद्ध पुरस्कार संशोधन विधेयक, 2026 और हिमाचल प्रदेश सड़क अवसंरचना संरक्षण विधेयक, 2026 शामिल हैं। भारतीय स्टांप विधेयक पर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई, जबकि युद्ध पुरस्कार संशोधन विधेयक और सड़क अवसंरचना संरक्षण विधेयक बिना चर्चा के पारित किए गए। पारित विधेयकों को अब राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। भारतीय स्टांप विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने विभिन्न शुल्कों में बढ़ोतरी को लेकर सरकार पर आम लोगों पर आर्थिक बोझ डालने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि महिलाओं के हितों को ध्यान में रखते हुए एक करोड़ रुपए तक की संपत्ति महिलाओं के नाम कराने पर स्टांप ड्यूटी आठ प्रतिशत से घटाकर चार प्रतिशत की गई है। एक करोड़ रुपए से अधिक कीमत की संपत्ति पर महिलाओं और अन्य खरीदारों के लिए आठ प्रतिशत स्टांप ड्यूटी होगी। पुरुष और अन्य खरीदारों के लिए 40 लाख रुपए तक की संपत्ति पर छह प्रतिशत और 40 लाख रुपए से अधिक पर आठ प्रतिशत शुल्क लगेगा। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि स्टांप कानून के कुल 65 प्रावधानों में से 49 में संशोधन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई दस्तावेजों पर शुल्क लंबे समय से नहीं बदला गया था, इसलिए दरों को मौजूदा परिस्थितियों के अनुसार तर्कसंगत किया गया है। शपथ पत्र की फीस 100 रुपए की गई है। संशोधन के तहत हिमाचल से बाहर के लोगों के लिए स्टांप ड्यूटी 12 प्रतिशत होगी। हिमाचल प्रदेश अभिधृति और भूमि सुधार अधिनियम, 1972 की धारा 118 (2) (ज) के तहत सरकार की अनुमति से संपत्ति का हस्तांतरण या पट्टा लेने वाले बाहरी व्यक्तियों पर यह दर लागू होगी। एक ही खरीदार और विक्रेता के बीच एक साल के भीतर दोबारा रजिस्ट्री होने पर, निर्धारित सीमा से अधिक कुल मूल्य होने की स्थिति में पहले के मामलों को जोड़कर आठ प्रतिशत स्टांप शुल्क लिया जाएगा। वहीं जयराम ठाकुर ने कहा कि वकील की फीस 100 से बढ़ाकर 1,000 रुपए, नोटरी की फीस 10 से बढ़ाकर 100 रुपए और सामान्य मुख्तारनामा की फीस 200 से बढ़ाकर 5,000 रुपए तक की गई है। हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2026 में परिवार की परिभाषा में बदलाव किया गया है। मौजूदा प्रावधान के अनुसार यदि किसी व्यक्ति ने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर रखा है तो उसका बेटा पंचायत या नगर निकाय चुनाव नहीं लड़ सकता था, जबकि उसकी बहू चुनाव लड़ सकती थी। संशोधन के बाद अतिक्रमण करने वाले परिवार की बहू भी पंचायत और नगर निकाय चुनाव नहीं लड़ पाएगी। राज्य निर्वाचन आयोग ने करीब छह साल पहले परिवार की परिभाषा बदलने का सुझाव सरकार को दिया था।
स्टांप शुल्क बढ़ाने पर सत्तापक्ष-विपक्ष आमने-सामने
हिमाचल विधानसभा के आखिरी दिन चार विधेयक पारित
पारित विधेयकों को अब राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
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Sukhwinder Kaur
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