बोलपुर, 19 सितंबर (हि.स.) : रवींद्रनाथ टैगोर की विरासत को जीने का एक और अवसर प्राप्त हुआ है। शांति निकेतन गृह, जो उनकी स्मृतियों और ऐतिहासिक विरासत को संजोये रखता है, अब पर्यटकों के लिए खुल चुका है। यह दरवाजा आज हैरीटेज वॉक के माध्यम से पर्यटकों के लिए उद्घाटित किया गया है। 6 सालों के बाद इस ऐतिहासिक भवन को पुनः खोलने का निर्णय उन लोगों के लिए खुशखबरी है जो शांति निकेतन की विरासत को करीब से जानना चाहते हैं। शांति निकेतन की खासियत यह है कि यहां इतिहास सिर्फ संग्रहालय में सीमित नहीं है। यहां की मिट्टी, पेड़, भवन, संगीत, कला और शिक्षा की परंपरा आज भी टैगोर की उस सोच की गूंज सुना रही है, जिसने बोलपुर के इस छोटे इलाके को विश्व सांस्कृतिक मानचित्र पर अलग पहचान दी। शांति निकेतन गृह को इस परिसर का सबसे पुराना ईंटों से बना मकान माना जाता है। यह स्थान महर्षि देवेंद्रनाथ टैगोर ने 1862 में खरीदा था और बाद में यही स्थान टैगोर परिवार की गतिविधियों और शांतिनिकेतन के विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बना। रवींद्रनाथ टैगोर ने 1901 में यहां ब्रह्मचर्याश्रम की स्थापना की, जिसने विश्वभारती की विचारधारा और शिक्षा-पद्धति की नींव रखी। अब हेरिटेज वॉक के दौरान पर्यटक इस ऐतिहासिक स्थल को देख सकेंगे। आने वाले दिनों में, उत्तरायण परिसर के अन्य ऐतिहासिक भवनों को भी खोलने की योजना है जिससे बोलपुर का यह इलाका विस्तृत रूप से टैगोर हेरिटेज सर्किट के रूप में विकसित हो सके। शांतिनिकेतन की पहचान केवल टैगोर के आवासीय भवनों से ही नहीं है, बल्कि यहां छातिमतला, उपासना गृह, बकुलबीथि, घंटातला, आम्रकुंज, पाठ भवन और सिंह सदन जैसे कई ऐतिहासिक स्थल भी हैं। शांति निकेतन गृह को हेरिटेज वॉक में शामिल करने के बाद, अब पर्यटकों को इस विरासत को और करीब से देखने का अवसर मिलेगा। इससे शांति निकेतन की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को और अधिक बढ़ावा मिलेगा।
6 वर्षों से बंद पड़ा था ऐतिहासिक भवन
पर्यटकों के लिए खुला शांति निकेतन गृह, हैरीटेज वॉक में दिखेगी टैगोर की विरासत की झलक
अब शांति निकेतन की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को और अधिक बढ़ावा मिलेगा।
By :
Sukhwinder Kaur
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