केन्द्रीय सशस्त्र बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक 2026 को संसद की मंजूरी
नयी दिल्ली, 02 अप्रैल (वार्ता) लोकसभा में गुरुवार को केन्द्रीय सशस्त्र बलों के अधिकारियों की प्रोन्नति से जुड़ा विधेयक केन्द्रीय सशस्त्र बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 पारित होने के साथ ही इसे संसद की मंजूरी मिल गयी। राज्यसभा में यह विधेयक पहले ही पारित हो चुका है। लोकसभा में इस विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इससे पहले तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा के संशोधन को ध्वनिमत से अस्वीकृत कर दिया गया।गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इससे पहले विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि जो विपक्षी सदस्य इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं या तो उन्होंने इसे ठीक से पढ़ा नहीं है या वे जानबूझकर इसका विरोध कर रहे हैं।
श्री राय ने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से भर्ती एवं सेवा शर्तों में सुधार के प्रावधान किये गये हैं। इससे जवानों के वित्तीय प्रावधानों को व्यवस्थित किया जा सकेगा। बल के विभिन्न राज्यों में पुलिस बलों के साथ निकट समन्वय से काम करते हैं। यह विधेयक केन्द्रीय बलों और राज्य पुलिस बल के अधिकारियों के बीच समन्वय बनायेगा।उन्होंने कहा कि इन बलों के जवानों और अधिकारियों को सेवा के दौरान चार पदोन्नतियां प्राप्त होती है, पांचवी पदोन्नति प्राप्त करने का भी अवसर मिलता है। प्रस्तावित विधेयक सशस्त्र बलों के अधिकारियों भी भर्ती और सेवा नियमन के बारे में है। यह विधेयक सीएपीएफ के किसी वर्ग के अहित में नहीं है। सीएपीएफ भर्ती पर विशेष ध्यान दिया गया है। तेरह भाषाओं में भर्ती परीक्षा हो रही है। सीएपीएफ दो लाख 10 हजार भर्तियां हुई हैं। सशस्त्र बलों में महिला वाहिनियां स्थापित की गयी हैं। सीमा पर बलों की महिला कर्मी चौकियों को संभालती हैं।श्री राय ने कहा कि वीरगति प्राप्त होने वाले जवानों के परिजनों को न्यूनतम एक करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की जाती है। सीएएफएफ के जवानों को पर्याप्त चिकित्सा और आवास सुविधाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं। बलों के परिचालन को सुदृढ़ करने के लिए नयी बटालियन बनायी गयी हैं। पहले भर्तियों में बहुत जटिलता थी, पहले भर्ती में दो साल से ज्यादा समय लगता था, अब यह करीब एक वर्ष का हो गया है। पेंशन तथा आर्थिक कल्याण के अनेक कार्य किये गये हैं।
उन्होंने कहा कि बलों का किस तरह मनोबल बढ़ा है, जवानों का मनोबल बढ़ने आतंकवाद अंतिम सांसे गिन नहीं रहा होता। नक्सलवाद समाप्त न हुआ होता। देश की सुरक्षा और अखंडता पैदा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करती है। पुलवामा घटना करने वाले जेल में मिलेंगे या जहन्नुम है।श्री राय ने कहा कि यह विधेयक सीएपीएफ को और अधिक सशक्त बनाने में सहायक होगा। यह किसी तरह से इन बलों के जवानों का मनोबल गिराने वाला नहीं है। यह विधेयक मुख्यत: अधिकारियों के लिए लाया गया है, ग्रुप ए के अधिकारियों के लिए लाया गया है।
लोकसभा में केन्द्रीय सशस्त्र बल विधेयक 2026 को मंजूरी प्राप्त
केन्द्रीय सशस्त्र बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक 2026 को लोकसभा और राज्यसभा दोनों से मंजूरी मिल गई है, जिससे सशस्त्र बलों के अधिकारियों की प्रोन्नति और वित्तीय प्रावधानों में सुधार होगा।
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