लखनऊ, 30 अगस्त (हि. स.) : उत्तर प्रदेश की मीरजापुर जिले की जिलाधिकारी रहते हुए अपने कार्यों से जनता में अपनी अलग पहचान बनाने वाली आईएएस दिव्या मित्तल ने त्याग पत्र दे दिया है। उन्होंने यह जानकारी रविवार को सोशल मीडिया एक्स पर साझा की है। उन्होंने पोस्ट में लिखा कि साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बैंगलोर से पढ़ने के बाद लंदन में नौकरी लग गई। पर 'सब कुछ' पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई और आईएएस अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला। बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि 'असंभव' कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और मां विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आंखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है और उसकी गरिमा बनाए रखना ही न्याय है। मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आई हूं। सच यह है कि सबसे ज्यादा मैंने ही पाया और वो कर्ज़ और भी बढ़ता गया। लोग मेरी खुशी में मुझसे ज़्यादा खुश हुए। उन्होंने मुझे तब भी उसी विश्वास से देखा, जब मैं खुद ही थकी या टूटी थी। और इसी ने आगे बढ़ते रहने की हिम्मत दी। इतना प्यार, इतना सम्मान, इतना अपनापन मिला, कि मेरी झोली पूरी भर गयी। और इसमें उन साथियों, अधिकारियों और कर्मचारियों का भी बहुत बड़ा श्रेय है जिन्होंने मेरे कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और साथ डटे रहे। आज आभार से आंखें नम हैं। बस एक दृश्य इनमें बसा है। लहुरिया दह की पहाड़ी की वो वृद्ध मां जो अपने गांव में पहली बार पानी पहुँचता देख कुछ नहीं बोली, बस काँपते हाथों से मेरा सिर छूकर आशीर्वाद दे गई। पद तो आज छूट गया, पर वह स्पर्श जीवन भर नहीं छूटेगा। और वह सपना भी नहीं छूटेगा, जो देश की इस मिट्टी ने मुझे दिया है।
विधानसभा चुनाव लड़ने की चर्चा तेज : आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के त्यागपत्र के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक अपने त्याग पत्र में उन्होंने मीरजापुर का कई बार जिक्र किया है। सूत्रों का दावा है कि दिव्या मित्तल मीरजापुर से विधानसभा चुनाव लड़ना चाहती हैं। बताया जा रहा है कि मीरजापुर में तैनाती के दौरान उन्होंने लहरिया दह पहाड़ी के गांव में पानी पहुंचाया था, जिसके बाद से ही उनका केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल से विवाद की चर्चा सामने आई थी। सूत्रों के अनुसार इसी प्रकरण के बाद उनका ट्रांसफर हुआ था। अनुप्रिया पटेल ने ही उन्हें मिर्जापुर से हटवाया था, ऐसी चर्चा है। हालांकि इस पूरे मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
उत्तर प्रदेश की मीरजापुर जिले की थी जिलाधिकारी
आईएएस दिव्या मित्तल ने त्यागपत्र दिया, लिखा भावुक पोस्ट
संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फाइल के पीछे एक व्यक्ति है और उसकी गरिमा बनाए रखना ही न्याय है।
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Sukhwinder Kaur
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