पटियाला, (हि.स.) पटियाला के डिप्टी कमिश्नर डॉ. हिमांशु अग्रवाल ने स्टूडेंट्स से कहा कि वे हार या नाकामी के डर को दूर करके अपने लक्ष्य को पाने के लिए लगातार मेहनत करें और लगातार अपना ज्ञान बढ़ाएं। वे जिला प्रशासन की अनोखी पहल ‘चेतना प्रोजेक्ट’ के तहत सरकारी सिविल लाइंस स्मार्ट स्कूल के 11वीं क्लास के स्टूडेंट्स से बातचीत कर रहे थे। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि जीत के लिए तो हर कोई मेहनत करता है, लेकिन असली सफलता के लिए हार मानने की काबिलियत भी होनी चाहिए। स्टूडेंट्स को मोटिवेट करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी नाकामी की वजह से मेहनत करना नहीं छोड़ना चाहिए। भले ही मंजिल तुरंत न मिले, लेकिन लगातार कोशिश करने से इंसान अच्छा इंसान जरूर बनता है। स्टूडेंट्स द्वारा कॉम्पिटिटिव एग्जाम और जीवन में सफलता के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि उन्हें अपने माता-पिता और टीचरों को रोल मॉडल बनाना चाहिए और सही-गलत की पहचान करना सीखना चाहिए। उन्होंने बच्चों को सोशल मीडिया पर कम समय बिताने और ईमानदारी से अपने काम के प्रति समर्पित रहने की भी सलाह दी। डॉ. हिमांशु अग्रवाल ने स्टूडेंट्स को रोज़ाना अखबार पढ़ने के लिए भी मोटिवेट किया। उन्होंने कहा कि समाज, देश और दुनिया में हो रही घटनाओं और उनके कारणों को समझने के लिए अखबार पढ़ना बहुत ज़रूरी है, जिससे जनरल नॉलेज के साथ-साथ सोचने की क्षमता भी बढ़ती है। इस टूर के दौरान स्टूडेंट्स ने डिप्टी कमिश्नर ऑफिस, डीसी कोर्ट, एम्प्लॉयमेंट ऑफिस, फर्द केंद्र, सेवा केंद्र, सांझ केंद्र, पुलिस स्टेशन और दूसरे सरकारी ऑफिसों का दौरा किया और सरकारी काम के तरीके और एडमिनिस्ट्रेटिव स्ट्रक्चर के बारे में जानकारी ली। इस मौके पर डिप्टी DEO रविंदरपाल सिंह, स्कूल प्रिंसिपल सीमा उपल, डिस्ट्रिक्ट रेडक्रॉस सोसाइटी के सेक्रेटरी डॉ. प्रितपाल सिंह, डिस्ट्रिक्ट एम्प्लॉयमेंट एंड एंटरप्रेन्योरशिप ब्यूरो के डिप्टी CEO सतिंदर सिंह, करियर काउंसलर रूपसी पाहूजा, नोडल ऑफिसर जगमीत सिंह और स्कूल के टीचर भी मौजूद थे।
हार या नाकामी से डरो मत, मेहनत ही सफलता की चाबी है
पटियाला में डॉ. हिमांशु अग्रवाल ने छात्रों को सफलता की दिशा में प्रेरित किया
डिप्टी कमिश्नर डॉ. हिमांशु अग्रवाल ने जिला प्रशासन के 'चेतना प्रोजेक्ट' के अंतर्गत सरकारी स्कूलों से बातचीत कर सफलता के लिए छात्रों को प्रेरित किया। उन्होंने हार को मानने के साथ-साथ लगातार प्रयास करने पर जोर दिया। सफलता के लिए माता-पिता और शिक्षकों की मार्गदर्शन भूमिका की आवश्यकता पर बल दिया।
By :
Harmanjot Singh
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