शिमला में हिंसा को रोकने की लड़ाई

शिमला में प्रदर्शन के दौरान भाजपा-एसएफआई कार्यकर्ताओं में धक्कामुक्की, दोनों पक्षों ने लगाए आरोप

शिमला में भाजपा के प्रदर्शनकारियों और एसएफआई की कार्यਕर्ताओं ने आतंकित होकर आपस में मारपीट कर माहौल बिगाड़ दिया। दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर कड़े आरोप लगाए

By : Just Click National , Sukhwinder Kaur

शिमला में प्रदर्शन के दौरान भाजपा-एसएफआई कार्यकर्ताओं में धक्कामुक्की, दोनों पक्षों ने लगाए आरोप

शिमला, (हि.स.) शिमला के सीटीओ चौक पर बुधवार को उस समय तनाव पैदा हो गया, जब अलग-अलग मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। पहले दोनों ओर से नारेबाजी हुई और फिर धक्कामुक्की शुरू हो गई। मौके पर मौजूद पुलिस ने बीच-बचाव कर दोनों पक्षों को अलग किया और स्थिति को नियंत्रित किया। सीटीओ स्थित उपायुक्त कार्यालय के बाहर भाजपा दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस और विपक्ष के प्रदर्शन के विरोध में धरना दे रही थी। वहीं, एसएफआई के कार्यकर्ता शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक की घटनाओं के विरोध और छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे थे। इसी दौरान दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और माहौल बिगड़ गया। भाजपा के धरने को संबोधित करते हुए प्रदेश उपाध्यक्ष बलबीर वर्मा ने कांग्रेस पर लोकतांत्रिक मर्यादाओं और संवैधानिक व्यवस्था का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में हुई हिंसा में 118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा। उन्होंने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की। बलबीर वर्मा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के राजभवन के बाहर धरने की भी आलोचना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को धरना देने के बजाय प्रदेश के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।
             घटना के बाद भाजपा के प्रदेश महामंत्री संजीव कटवाल ने आरोप लगाया कि पार्टी का प्रदर्शन प्रशासन से पूर्व अनुमति लेकर शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित किया गया था, लेकिन सीटू और एसएफआई से जुड़े कार्यकर्ताओं ने वहां पहुंचकर माहौल खराब करने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि छात्रों, विशेषकर छात्राओं को आगे कर टकराव की स्थिति बनाई गई। कटवाल ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन पूरी घटना के दौरान मूकदर्शक बना रहा और बिना अनुमति प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए और यह भी स्पष्ट किया जाए कि उन्हें सीटीओ परिसर और रेन शेल्टर में किस आधार पर बैठने की अनुमति दी गई। दूसरी ओर एसएफआई का कहना है कि उसके कार्यकर्ता शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक के विरोध और छात्र हितों की मांगों को लेकर शांतिपूर्ण क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे थे। संगठन का आरोप है कि इसी दौरान माहौल बिगड़ने से यह घटना हुई।
 

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